यूपी के इन जिलों से सैकड़ों किमी पैदल चल हजारों लोग आते है देवीपाटन, भुजवा मेलें के नाम से मिली है प्रसिद्धि, जानिए कैसे शुरू हुई परंपरा

बलरामपुर जिलें के तुलसीपुर में स्थित 51 शक्तिपीठों में से देवीपाटन मंदिर शक्तिपीठ में मां पाटेश्वरी की आराधना के लिए वैसे तो देश विदेश से लोग आते है. लेकिन प्रत्येक चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि को देवीपाटन मंदिर में हजारों की संख्या में झुंड में पहुंचने वाले भुजवा बाबा का मेला देखते ही बनता है. 





यह मेला सैकड़ो वर्ष पुरानी परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष आधा दर्जन से अधिक जिले से लोग चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन एक झुंड में होकर हजारों की संख्या में लोग बलरामपुर जिलें के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर में माँ पाटेश्वरी के दर्शन को निकलते हैं.


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भुजवा बाबा के मेला में अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, सीतापुर व अयोध्या धाम तथा गोंडा सहित तमाम जिले के हजारों लोग शामिल होते हैं. आस्था एवं श्रद्धा के साथ लोग पैदल ही चलते हुए तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर में मां पाटेश्वरी के दर्शन को पहुंचते है, यहां पहुंचने के बाद भुजवा बाबा का मेला रात्रि विश्राम करता है. 


जलती फर्श पर लेट मंदिर की करते परिक्रमा

रामनगरी से आने वाले भुर्जी समाज के लोगों का जत्था करीब 150 किमी की पैदल यात्रा करके आता है. इसके बाद सूर्य कुंड में स्नान करके नंगे होकर भीगे बदन साष्टांग दंडवत (लेट कर) करते हुए देवी मां का दर्शन करते हैं. ऐसे ही वह मंदिर की परिक्रमा भी करते है. इस पूरी प्रक्रिया में उनके साथ बूढ़े, बच्चे एवं महिलाएं भी आस्था के सागर में गोते लगाती हैं. यह ऐसा अद्भुत नजारा होता है कि समूचा मंदिर परिसर भक्तिमय हो जाता है. 


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मनौती पूरी होने पर बना श्रद्धा का केंद्र

जनश्रुति हैं कि काफी समय पहले सोहावल के भुर्जी समाज का एक व्यक्ति कठिन समस्या से जूझ रहा था. जिसे लेकर वह पैदल यहां पर आया और मनौती मांगी.उसके लौटते ही सारी समस्याओं का निदान हो गया. यह देखते ही उसके गांव व आसपास क्षेत्र के भुर्जी समाज के लोग भी पैदल देवीपाटन आकर देवी मां का दर्शन करने लगे. समय बीतने के साथ ही भुर्जी समाज के जत्थे में इजाफा होता रहा. अब सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल यात्रा कर यहां दर्शन करने पहुंचते हैं.

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